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Rudra


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पाई, अब्ब तो बन जाओ..

Posted On: 3 Jan, 2011  
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Others मेट्रो लाइफ में

379 Comments

एक कार्टून आपके लिए.

Posted On: 13 Jun, 2010  
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Others मस्ती मालगाड़ी में

500 Comments

करारा जवाब मिलेगा

Posted On: 13 Jun, 2010  
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Others पॉलिटिकल एक्सप्रेस मस्ती मालगाड़ी में

356 Comments

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rich Menga / October 30, 2008Thanks for mentioning my name even though it states so right under the title of the article! Never can get anything by you!“As someone quite smart posted elsewhere..” Ah, nice jab there. And pointless.Someone truly smart would have not suggested to read the Wikipedia (as if that place is absolute truth). Wrong.. wrong.. wrong.Happy Halloween back at’cha! Don’t forget to suebrcisb!Reply

के द्वारा:

Bélanger: J’ai l&po;usqimrression que le Québec les traite mieux en général. J’ai déjà été contactée par des boites Québécoises et à une exception près, j’ai toujours obtenu des réponses après une entrevue téléphonique ! Mais si tu lis d’autres articles similaires sur le blog, il semble que certains disent qu’en fait c’est pareil au Québec et qu’il n’y a aucune différence avec l’Ontario dans la manière de procéder… Je n’ai malheureusement que 4 ou 5 exemples à citer pour la belle province.Répondre

के द्वारा:

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

रूद्र जी नमस्कार ! आप पहले बता देते ! असल में हुआ ये की मैंने भी आज ही भ्रष्टाचार पर व्यंग्य डाला है ! चलो कोई बात नहीं ! अब आते हैं आपके लेख पर ! आपने अन्ना आन्दोलन का एक सटीक चित्रण और आप बीती बयां की है ! बल्कि हकीकत बयां की है ! मैंने खुद इस तरह से होते हुए देखा है ! लेकिन मित्रवर जब इतने लोग इकठ्ठा होते हैं तो जरूरी नहीं की सब लोग पाक साफ़ हों ! कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो सच में चाहते हैं की जन्लोक्पल बिल आये और कुछ भीड़ बढाने वाले , टी वि पर अपना चेहरा दिखने को आतुर ! ये भी ठीक है की ज्यादातर लोग सिर्फ ऐसे ही आते हैं किन्तु फिर भी लोकतंत्र में भीड़ ही तो चाहिए ? भीड़ आदमियों की होनी चाहिए और क्या ! लोकतंत्र -भीडतंत्र ही तो है ! बहुत सटीक और यथार्थ लेखन !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: rudra rudra

के द्वारा: rudra rudra

के द्वारा: rudra rudra

के द्वारा: rudra rudra

के द्वारा: rudra rudra

भाई साहिब आपने तो अपने पिताश्री जी को भी नहीं बख्शा इसलिए आपसे डर लग रहा है वैसे आजादी कि लड़ाई में गर्म दलीय क्रान्तिकारीयों का कुछ कम योगदान नहीं था ..... और अपने देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा रखना और देश के मोजुदा ढ़ांचे में सुधार कि आशा और अपेक्षा रखना किसी भी लिहाज से बुरा नहीं कहा जा सकता .... सपने तो आदमी खुद के लिए सारी उम्र ही देखता रहता है ....ऐसे में अगर जवानी में देश और समाज के लिए सोचने वाले नोजवानो को मेरा सलाम ...... हमे खुद के गधे होने पर गर्व है ..... गर्व से कहो हम गधे है ! (नया राजकमल शर्मा – गधा ) लेख पढ़े ..... इस युग प्रवर्तक लेख पर ढ़ेरो मुबारकबाद :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

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