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किसी के पास लोटा नहीं है. ( व्यंग )

Posted On: 9 Dec, 2011 Others में

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एक बार राम खेलावन के चाय के दुकान पे बैठकी लगी. हमारे पुराने मित्र कनाडा हो के आये थे. हम सब मित्रों मैं उत्सुकता थी. भाई हम सब आज तक नेपाल तक न जा पाए विदेश भ्रमण पे कनाडा क्या जायेंगे.
मित्र ने बाते की: कनाडा बहुत साफ़ सुथरा है. शीशे जैसे चमकते रोड हैं . भारत मे गन्दगी है, बदबू है. हमने कहा बदबू तो फैलाते भी आप ही हैं. हमारे एक मित्र गदह पच्चीसी से पीड़ित थे. रुका नहीं गया. काफी देर से पूछना चाहते थे. पूछ ही लिया. “गुप्ता जी, कनाडा मैं लड़कियां कैसी हैं”. गुप्ता जी ठिठके. शर्माए. भाई शादी शुदा आदमी इस तरह से बात पूछोगे तो शर्मायेगा ही. गुप्ता जी थोड़ी देर के लिए गुप्ता जी से शर्मा जी बन्न गए. इधर उधर देखा. कहीं बीवी का जासूस तो नहीं बैठा इस बात पे आश्वस्त हो लिए. फिर गुप्ता जी ने अपने गुप्त ज्ञानं का पिटारा खोला.
भाई , कनाडा मैं लड़कियां बहोत गोरीं हैं. सन्नी लिओने से भी जायद. कटरीना भी देख शर्मा जाये.हम सब सन्न. गुप्ता जी बोले भाई वहां फेयर एंड लोवेली कोई नहीं लेता. सब गोरे हैं. कारन है की हमेशा सर्दी होती है. भारत जैसा नहीं है. गर्मी गर्मी. राम खेलावन भी अब उत्सुक हो गया. “गुप्ता भैया मतलब पूरा हर जगह बर्फ.” राम खेलावन ने पूछ. “हाँ जी” गुप्ता जी ने हामी भरी.” गुप्ता भैया था वहां के लोग खेतों मैं शौच के लिए कैसे जाते हैं”. लोटा का पानी भी जम जाता होगा? सब हसे. बात सही थी. अरे सब के पास बाथरूम है वहां. लेकिन कोई तो गरीब होगा, गाव के लोग होंगे. चर्चा चली. किसी ने बोला गरम पानी ले के मैदान जाते होंगे. मिश्र जी ने अपनी साइंटिफिक बुद्धि का परिचय देते हुए कहा की वैसा लोटा ले के जाते होंगे जिसमे हमेशा पानी गरम हो. गुप्ता जी खीझ से गए. कहा सब अकाल के अंधे हो. वहां कोई गरीब नहीं है. गरीब नहीं है? ऐसा कैसे? हर देश मैं गरीब हैं. सब के पास बाथरूम है, गुप्ता जी ने आगे की जानकारी दी. मतलब वहां के गरीबो के पास भी बाथरूम है. जिन गरीबो के पास नहीं थी वो कब का ठंढ मई मर गए.
गुत्पा जी ने किसी तरह से लोटा राह शांत किया. अभी भी लोग उसी पे जिक्र कर के हस रहे थे. बात फिर बरफ पे आई. मिश्र जी ने फिर पुछा की सुना है बर्फीले जगह पे जंगली कुत्ते झबरे वाले होते हैं, जो हम अपने घर पे पलते हैं. गुप्ता जी ने कहा की ऐसा नहीं है. मिश्र जी ने गुप्ता जी पे शक की सुई घुमा दी. अरे ऐसा कैसे नहीं है. उनके जीजी जी गए थे एक बार, बताया था उन्होने यह बात . यह गुप्ता झूट बोले जा रहा है. कोई कनाडा नहीं गया यह. बोलता है की देश मैं सब के पास बाथरूम है, कोई लोटा ले के नहीं जाता. हमे बेवक़ूफ़ बनता है.
गुप्ता जी हाथ जोड़ लिए. हम भी चाय पे के निकल लिए.

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856 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Meadow के द्वारा
July 11, 2016

No kylmä totuushan on vaan se että nämä erikoisruokavaliot kaataa pikkuyrityksiä alalta pois ! Jos työvuorossa, kannattavien laskelmien mukaan olisi yksi kokki ,ei hän mitenkään selviä tuosta &#12i8;valiov2idakosta”, kun kuitenkaan tuskin kukaan on valmis maksamaan lisää sairaudestaan aiheutuvista kuluista.Saisikohan KELALTA jonkun yrittäjää tukevan kulukorvauspassin tukemaan jo muutenkin työvoimavaltaisen ja kilpailurasitteisen alan toimintaa.

mrigankved के द्वारा
May 8, 2012

भईया जे इ जो राम खेलवन है बहुत जबरजस्त बात खा दिहिस है लूटा में पानी जमने वाला बात .हाथ तो जोड़ना हे पड़ेगा उ गुप्तवा को. ऐसे रूद्र जे आप भी वय्नाग के ब्लॉग अच्छे लिखते है .ऐसे हे वय्नाग के कुछ और भी ब्लॉग लिखये जेसे हमें कुछ हसने और अपने स्कूल के हिंदी के किताब के याद आते रहे. आपका , चीकू

    Matee के द्वारा
    July 11, 2016

    wszystko fajnie i pięknie ale stery do starszych kart ATI nie działają, nie jest to wina samego ubuntu ale mogli zostawić moüw…liÂość instalacji starszych Xów

Praveen के द्वारा
December 13, 2011

रूद्र जी. मैने आपके सारे व्यंग पढे हैं. आप बहुत ही साधारण तरीके से अपनी बात पाठक गण तक पंहुचा देते हैं. ऐसे ही लिखते रहिये. आपकी शैली भी अच्छी है. जागरण पे आपके ब्लोग्स अलग तरीके के हैं. मन को गुदगुदाते भी है. लोटा राग पे ब्लॉग के लिए धन्यवाद. (वहां कोई गरीब नहीं है. गरीब नहीं है? ऐसा कैसे? हर देश मैं गरीब हैं). धन्यवाद. प्रवीण

    rudra के द्वारा
    December 13, 2011

    प्रवीण जी. व्यंग पसंद करने के लिए धन्यवाद. लोटा राग भाग २ बहुत जल्द लिखने जा रहा हूं. उम्मीद है आपको पसंद आयेगी.

    Geralynn के द्वारा
    July 12, 2016

    Spot lets start work on this write-up, I actually feel this site requirements considerably more co.âlderationnIs€™il oftimes be once again to see additional,thanks for that info.

Abhinav Bodas के द्वारा
December 13, 2011

बहुत साधारण, सरल तरीके से आपने दिल जीत लिय़ा 

    rudra के द्वारा
    December 13, 2011

    अभिनव जी.. धन्यवाद. .

    Vinnie के द्वारा
    July 12, 2016

    Bélanger: J’ai l&po;usqimrression que le Québec les traite mieux en général. J’ai déjà été contactée par des boites Québécoises et à une exception près, j’ai toujours obtenu des réponses après une entrevue téléphonique ! Mais si tu lis d’autres articles similaires sur le blog, il semble que certains disent qu’en fait c’est pareil au Québec et qu’il n’y a aucune différence avec l’Ontario dans la manière de procéder… Je n’ai malheureusement que 4 ou 5 exemples à citer pour la belle province.Répondre

jlsingh के द्वारा
December 11, 2011

रूद्र जी, बधाई! सुन्दर व्यंग्य लिखने के लिए. यह गुप्ता झूट बोले जा रहा है. कोई कनाडा नहीं गया यह. बोलता है की देश मैं सब के पास बाथरूम है, कोई लोटा ले के नहीं जाता. हमे बेवक़ूफ़ बनाता है. गुप्ता जी हाथ जोड़ लिए. हम भी चाय पी के निकल लिए.

    rudra के द्वारा
    December 12, 2011

    प्रोत्साहन के लिए धय्न्वाद. आशा है भविष्य में भी आपको मेरी रचनाये पसंद आयें.

    Azia के द्वारा
    July 12, 2016

    What your declaring is totally accurate. I know that everybody need to say the exact same issue, but I just believe that you set it in a way that every person can undtnseard. I also appreciate the photos you put in right here. They suit so effectively with what youre trying to say. Im guaranteed youll achieve so many men and women with what youve acquired to say.

minujha के द्वारा
December 10, 2011

मन को हल्का कर देने वाली आपकी लेखन शैली  अच्छी लगी,बहुत अच्छा प्रयास

    rudra के द्वारा
    December 12, 2011

    धन्यवाद. उम्मीद है की आपको मेरी आगे की रचनाये भी पसंद आयेंगी.

    Irais के द्वारा
    July 11, 2016

    Si votre PS est à ce point, que dire du nôtre qui vient de perdre les législatives. Le nôtre aussi n’a jamais su ou voulu se réformer et il en paie les conséquences. Ajoutons-y les scandales pofirico-linanciets dont il a fait et fait toujours l’objet. Le problème de la gauche dépasse les frontières de la France et s’étend, selon moi, à toute l’Europe communautaire.

shashibhushan1959 के द्वारा
December 10, 2011

मान्यवर रूद्र जी, गाँव के लोगों की भोली और इस जमाने के लोगों के लिए बेवकूफी लगने वाली बातों का रोचक वर्णन. अच्छा लगा. बधाई.

    rudra के द्वारा
    December 12, 2011

    धन्यवाद शशि भूषण जी.

    Suzy के द्वारा
    July 11, 2016

    Ihan mielenkiintoinen kommentti, itse olen tähän mennessä syönyt soijaa hyvillä mielin, koska tuloksia, onko se “epäterveellistä” ja kuinka paljon, on hyvinkin ristiriitaista tietoa. Lisäksi uskon, että (luomu)soijan syöminen on aina parempi vaihtoehto kuin syödä lihaa. Suomessakin elämille syötetään paljon geenimuunneltua rehua, puhumattakaan lihansyönnin ekologisista ja eettisistä vaikutuksista. Ka¤ÃÃssyöjv¤nki¤Ãsn ei ole pakko syödä soijaa älyttömiä määriä, onneksi on kaikenlaisia ihania papuja ja linssejä ja muita proteniinipitoisia tuotteita.

abodhbaalak के द्वारा
December 9, 2011

रूद्र जी सुन्दर और सरल शब्दों के साथ आपने इस रचना को मंच पर रखा है बहुत सुन्दर, , ऐसे ही लिखते रहें http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    rudra के द्वारा
    December 9, 2011

    प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद.


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