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पाई, अब्ब तो बन जाओ..

Posted On: 3 Jan, 2011 Others,मेट्रो लाइफ में

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Life_of_Pi_cover
वर्ष २००२ मैं मैने यन्न मार्टेल की एक अंग्रेजी उपन्यास पढ़ी थी ” लाइफ ऑफ़ पाई”. कहानी भारत के पोंडिचेरी की थी. एक रोचक और बंधी हुई कहानी. कभी मिले तो आप जरूर पढें.
उपन्यास को २००३ मैं बुकर से सम्मनित किया गया. मैं यहाँ आपको कहानी नहीं बताऊंगा परन्तु मैं इससे सम्बंधित अपनी व्यथा को बतना चाहता हूँ.
हुआ यूं की इस उअप्नायास का मैं ज़बरदस्त प्रशंशक हो गया. पिछले ७ सालों मैं ८ बार पढ़ चूका हूँ. वर्ष २००२ मैं ही बहुचर्चित फिल्मकार मनोज नाएट शय्मालन ने कहा की इस कहानी पे वो फिल्म बनायेगे. उसी साल फिर एक ब्रिटिश मगज़ीन से कहा की अब वो यह फिल्म नहीं बना रहे हैं.
फिर 2007 मैं अलफोंसो ने कहा की वो इस उपन्यास पे फिल्म बना रहे हैं लेकिन पैसों की कमी के कारन नहीं बना पाए.
वर्ष 2009 मैं अंग ली ने कहा की अब्ब वो इस उपन्यास पे फिल्म बना रहे हैं. फिल्म 3D मैं 2012 मैं आएगी. 3000 लडको का मैं से दिल्ली के सूरज शर्मा को “पाई” के किरदार निभाने के लिए चुना गया.

यानी अगर आप गौर से देखें तो मैं जब पहली बार पर्दे पे फिल्म देखूंगा तो मेरा १० वर्षो का इंतज़ार होगा.

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