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फेस्बूकिया समाज के असामाजिक तत्व ! ( भाग १)

Posted On: 27 Oct, 2012 में

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“क्या महाराज , आप तो एकदमे असामजिक आदमी निकल गए. सोशल नहीं उन्सोसिअल हैं आप. कोई सोशल नेटवर्किंग साईट पे प्रोफाइल नहीं है? बाबर के जमाने से हैं का?”! शायद आपको इस तरह के शब्द सुनने को मिल जाये अगर आप कहीं खुले आम यह कर के बता दें की आपकी फेसबुक पे कोई अकाउंट नहीं है. माँ बाप तो आजकल सबसे पहले बच्चे का फेसबुक अकाउंट खोलते हैं भले बैंक अकाउंट हो या न हो. भाई यूजर आई डी मिलना भी बड़ा मुश्किल का काम है. बच्चा पैदा होने के तुरंत बाद फेसबुक पे रिलीज़ हो जाता है. टैग लगा दिया जाता है “माय क्युटी पाई ” और न जाने तरह तरह के संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण से उसके दिवार को भर दिया जाता है.
फसबूकिया समाज ने एक नए तरह का धर्म शुरू किया है. जिसको आप दिखावा का धर्म कह सकते हैं. अंग्रेजी में कहें तो “Shwo -off “. हर कोई दिखावे मैं जीना शुरू कर दिया है. कहीं घुमने जाओ तो फोटो ऐसा आये की फेसबुक पे अपलोड किया जा सके. जिसको जितना लाइक मिले वो उस धर्म का धर्म गुरु. लड़कियों को इस धरम में सर्वोच्च्या स्थान प्राप्त है. वो कुछ भी लिखे, पोस्ट करें, अपलोड करें उनके १००० अनुयाई तुरंत सक्रिय हो जाते हैं. आप काफी पाठक गण इस फसबूकिया समाज का हिस्सा हैं और इन पहलू से वाकिफ हैं.
फेसबुक के कारण सबसे जयादा कमाई कैमरा बनाने वाले कंपनी ने किया है. आज कल जिसको देखो डिजिटल कैमरा ले के फोटोग्राफर बना पड़ा है. लोगों के फोटो खिचवाने का शौक भी बढ़ा है. भाई, फेसबुक पे फोटो डालना है, पुराने बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड का दिल भी जलना है. सबको बिंदास बनना है.
अब मैं मुद्दे पे आता हूँ …. कुछ लोग तो इस फेसबुक समाज में दिखावे-पण की हद पार कर देते हैं. अपनी प्रेमिका से सम्बन्ध तोडने के बाद खुले आम फसबूकिया समाज को बता देते हैं. “like ” बढती है, प्रेमिका कुछ गलत कदम उठा लेती है. हर समाज के कुछ अच्छे और बुरे पहलु होते हैं. फसबूकिया समाज के भी हैं. अच्छा यह है की भूले बिसरे मित्रो से मिल के और सामाजिक प्राणी बनते हैं. अरस्तु शायद जिन्दा होते तो अपने कथन पे और गर्व करते. मनुष्य केवल सामाजिक नहीं सोशल नेटवर्किंग प्राणी भी है.
फेसबुक समाज में दुस्ट प्राणी भी निवास करते हैं. जिनका दो मुहा चेहरा होता है. एक तो सामाजिक चेहरा और दूसरा असामाजिक. अब आप सोचोगे की फेसबुक समाज पे असामाजिक कार्य कैसे किया जा सकता है? साधारण समाज में चोरी, डकैती , बलात्कार , आतकवाद जैसे असामाजिक , दुष्टता वाले काम है . सो भाई साब, आखें खोलिए यहाँ पे भी लोग भरे पडे हैं. जबरदस्ती किसी लड़की को “फ्रेंड रिक्वेस्ट ” भेजना छेड़-खानी से कम नहीं है. देखिये तो एक से एक पेज मिलेंगे. अब ऐसे पेज के नाम पे गौर करिएँ आपको पता चल जायेगा क्या हो रहा है हिन्दुस्तान्न के फेसबुक समाज में. पेज के नाम हैं, “मस्त पंजाबन” जहाँ पे लड़कियों के तस्वीर लगा के पूछी जाती है कौन लड़की मस्त है. हद है. बेचारी लड़की को पता भी नहीं की उसकी प्रोफाइल की फोटो उदा ली गयी है और मस्त रेटिंग में ९/१० दिया जा रहा है. करीब २००० लौंडे दीवाने हैं. वहीँ डेल्ही लेस्बिना क्लब, डेल्ही डेटिंग क्लब, aunty without panty जैसे कई पेज उदाहरन हैं.
दिक्कत है, की आम समाज में नियम है और कानून है. फेसबुक समाज में कुछ नहीं. ऑनलाइन जिम्फरोशी का धंधा भी जारी है. कुछ तो ऐसे अपराध हो रहे हैं जो अभी तक कानून के दायरे में नहीं आये और फेसबुक समाज के असामाजिक लोग इसका भरपूर फायदा उठा रहे हैं…
आगे के पोस्ट में, मैं कुछ ऐसे आशार्य्जंक फेसबुक समाज के अपराधिक तत्वों की बात करूंगा. बस मेरे सात बने रहिये. एक दिन का इंतज़ार है. ………..

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