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लोटा व्यंग लिखना भारी पड़ गया

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कुछ महीनो पहले मैने एक लोटा व्यंग लिखा था. शायद किसी ने पढ़ा नहीं लेकिन मेरे मित्रो ने बहुत मजे लिए. मार्च के महीने मैं मुझे न्यू यॉर्क आना पड़ा और तब से यहीं फसा पड़ा हूँ.
बात हुई कुछ ऐसा की मैं यहाँ लोटा व्यंग का खुद शिकार हो गया हूँ. सही में यहाँ अमेरिका में लोटा नहीं है. ऑफिस में अगर नित्य क्रिया की जरूरत पड़ जाए तो धर्मसंकट!! भाई, देहाती आदमी ठारे हम, पेपर से काम नहीं चला सकते. पानी की जरूरत है. इसलिए सुबह सुबह इतनी कोशिश जरूर होती है की नित्य क्रिया-करम घर पे ही कर लें, अमेरिका में तो ३०% कागज उद्योग इसी कार्य में लगा है जिससे सब का पिछवाडा साफ़ रहे. इसलिए शायद यहाँ कहीं भी पानी की किल्लत नहीं है. हाल ही में बर्गर किंग में बर्गर खाने गए. देखा की बर्गर जो कागज में लपेटा था वो रे-साइकिल पेपर था भाई. मेरे एक मित्र हैं, बोले पडे पता नहीं किस तरह का कागज रि-साइकिल हुआ होगा. :)
जब तक बहार के गाँव में हूँ यह सब सहना है. क्या देश है, लोकतंत्र है लेकिन आज़ादी नहीं है. आप कहीं ठुक नहीं सकते , कहीं भी शू-शु नहीं कर सकते . यह भी कोई लोक-तंत्र है? हमरी भारत में देखो? तिवारी जी के घर के सामने अपने टोमी को पॉटी करा आओ और मनन करे तो सुबह – सुबह खुद भी कर लो. अब यह आज़ादी अमेरिका में कहाँ. बड़ा ही असहज फील कर रहा हूँ.
और तो और कोई कल्चर ही नहीं है . जान न पहचान लेकिन मिल जाओ तो सब एक दुसरे हो हेल्लो, हाउ आर यू , पूछ देते हैं. कल्चर तो हिन्दुस्तान में है. ताऊ जी निकलते थे सामने से, तो मूह ऐसे घुमा लो की देखा ही नहीं. बुढे ताऊ की क्या मजाल की कुछ बोले दें. ताऊ सेल मन्न में सोच लेते थे की लौंडा जवान हो गया है कुछ बोलोगे तो ज़मीन बटवारे की बात कर लेगा. इंडिया यानी हिन्दुस्तान में तो यह फ़ैल के घुमते थे. अब यहाँ के बडे साहब मिल गए इंग्लैंड के अँगरेज़. १५- अगस्त की छुट्टी तो थी नहीं, बडे मालिक की जी-हजुरी में लगे हुए थे. बडे साहब ने पूछ ही लिया – रूद्र बेटा, क्या काम कर रहे हो, आज तुम्हारा स्वतंत्रता दिवस है जाओ पार्टी करो. हम भी कम कहाँ, बोले क्या स्वतंत्रता , आज भी आपकी जी-हजुरी कर रहा हूँ. पहले दादा- परदादा नाग्रेज़ के गुलाम थे, पिता जी ने हिन्दुस्तानी की ही गुलामी की, में फिर से वापस आपकी कर रहा हूँ. सब समय का चक्र है. बार बार घूमता है. इंग्लैंड के साहब हस पडे. बोले की शायद तुम भूल गए के मेरा बड़ा बॉस इंडियन है :). यानी दुनिया गोले नहीं, सिमट चूका है. वसुध्येव कुतुम्बकम्ब !!!!

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707 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
October 30, 2012

जब तक बहार के गाँव में हूँ यह सब सहना है. क्या देश है, लोकतंत्र है लेकिन आज़ादी नहीं है. आप कहीं ठुक नहीं सकते , कहीं भी शू-शु नहीं कर सकते . यह भी कोई लोक-तंत्र है? हमरी भारत में देखो? तिवारी जी के घर के सामने अपने टोमी को पॉटी करा आओ और मनन करे तो सुबह – सुबह खुद भी कर लो. अब यह आज़ादी अमेरिका में कहाँ. बड़ा ही असहज फील कर रहा हूँ अपनी कहानी बयान कर दी आपने , मस्त अल्फाजों में ! भाई आज़ादी तो है हिंदुस्तान में !

    Xexilia के द्वारा
    July 11, 2016

    Большое спасибо за А‘‘‚веÃÂ!ВсþµÃ³да ли это титан или возможны варианты? Бывают ли в практике другие варианты металла, из которых делают клипсы?

yatindranathchaturvedi के द्वारा
October 24, 2012

बहुत बढ़िया ,स्वागत है ।

    Rudra के द्वारा
    October 24, 2012

    धन्यवाद. उम्मीद है मेरी बिना सर-पैर की बातें पसंद आयीं होंगी :)

    Karik के द्वारा
    July 12, 2016

    I guess my rant above sounded a bit harsh. Just to restate: The same treasonous socialist sleezebags who support the destruction of both the USA and Israel do not deserve to accuse others of anmssiemiti-t, when in fact they surround themselves with anti-semites and call them friends.


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