Kalam ki ek sooch

Just another weblog

14 Posts

9230 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2238 postid : 142

चलो थोडा भ्रष्टाचार हम भी मिटा लें ( व्यंग )

Posted On: 7 May, 2012 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

बात कुछ पुरानी है.छोटकन जी मेरे घर बंगलोरे आये थे. अन्ना मोवेमेंट उसे समय काफी समय से चल रहा था. इस मामले में हर कोई उत्साह के साथ उनके समर्थन में था. मौके का फायदा देख मुहल्ले के छुटभैया नेता मोर्चा निकाल देते थे. कोई न मिलता तो बेचारे स्कूल के बच्चे ही सही. पकडाओ हाथ में corruption हटाओ का बोर्ड और सिद्ध कर दो अपनी नेतागिरी. कुछ लोगो ने अन्ना जी के नाम पे चंदा इकठा किया. वो fund कहाँ गया किसी को नहीं मालूम. छुटभैया नेता खा पि के डकार गए. हम जैसों ने भी खाने दिया. सोचा की चलो अन्ना के पास जा नहीं सकते नौकरी का सवाल है इन्ही को चंदा देते हैं और अपनी भागीदारी दिखा देते हैं.
छुटकन जी को लगा की वो और में इस मामले में उदासीन हैं. उन्होने कहा की भैया आज हम भी चलते हैं अन्ना को support करने. इस इलाके के फल्लन नेता ने आज मार्च निकलने का फैसला किया है. उसमे हमे मोमबत्ती ले के खडे रहना है. मैने सोचा चलो हम भी थोडा भ्रस्ताचार मिटा देते हैं.
वैसे मोमबती मार्च का आयोजन मुहल्ले से थोडा दुरी पे था. वहां से पैदल चल के २ की.मी की दुरी पे freedom पार्क तक जाना था. हमने छुटकन जी से पुछा की भाई साम को ७ बजे का आयोजन क्यूँ रखा है? सुबह कर देते तो इसमे सम्लित हो के ऑफिस भी चले जाते. तो पता चला की नहीं मोमबती शाम को जलेगा तो टी. वि और फोटो में अच्छा दिखेगा, इसलिए नेता ने बोला शाम को चलेंगे.शायद आज-तक पे हमारी तस्वीर आ जाये. हमने कहा की भ्रस्ताचार भगा रहे हो या फैशन परेड पे जा रहे ho?खैर शाम को हम जल्दी घर आ गए, देखा की छुटकन जी पजामा कुरता पहन के तैयार हैं. सिने पे एक बैज लगा था “I am Anna “. छुटकन जी ने मुझे भी दिया और मैने मना कर दिया.हमने सोचा की गंतव्य तक पहुचने के लिए मोटरसाइकिल का उपयोग ही सही होगा. बस, छुटकन जी बैठ गए पीछे और मैने हांक दी अपनी काली घोड़ी. काली घोड़ी सरपट दौड़ गंतव्य तक ५ मिनट में पंहुचा दी.अच्छा खासा हुजूम लगा था. छुटभैया नेता अन्ना के नाम पे रोटी सकने में लगे थे. पूरा माहोल बना था. नेता जी ने एक भासन दिया.जबरदस्त सा भासन डाउनलोड किया था गूगल से उन्होने. हमने सोचा चलो गूगल करना तो आता है इनको, शायद भविष्य में कोई अच्छी योगना गूगल कर के ही पर्रित कर दें.अब तक मीडिया वाले भी पहुच चुके थे. जितनी लोग curruption मिटाने पहुचे थे सब अब टीवी पे आने को उतारू. एक महासय अपने बेचारी ६ साल की बच्ची का मुह पे paint करा टीवी वालों से request पे request कर रहा थे की उसको टीवी पे दिखाएं. बेचारी बच्ची को पता भी न था की जन लोकपाल क्या है? मेला लगा. लोग आये.चाट पकोड़ी खाए.तभी मोमबत्ती जलाने की बात आई.हमारे पास मोमबती थी नहीं. ले के नहीं आये थे. उसी अन्ना मेले में मोमबती बिक रही थी. ५ वाली ३० की. सब हैरान Anti -corruption के मेले मैं ही corruption !!! अब जोश था.टीवी पे आना था. दुनिया को दिखाना था.खरीद ली ३० रुपये वाली इमानदारों की मोमबत्ती.फिर मोर्चा ख़तम हुआ.सब घर को चलने लगे.हम भी चले पार्किंग की तरफ. वहां देखा की पोलिसे वाले खडे हैं. इल्लेगल पार्किंग के नाम पे ३५० रुपये का परचा हाथ में लिए. जेब मैं १०० रुपये बचे थे. क्या करते? भूल गए तभी अन्ना को और पकड़ा दिए ५० का पत्ता . पोलिसे वाला भी ले लिया. सस्ते में छुट गए.मेरे जैसे बाकि आन्दोलनकारियों का यही हाल था.
हो गया बेडा पार भारत का.उसी समय पता चला की कुछ नहीं होने वाला है. आपकी छोड़ो. इस महंगाई में मैं जन लोकपाल आने नहीं दूंगा. जो २५० रुपये बचाए भाई उसे सरकारी आंकडे के अनुसार ५दिन अपना परिवार चला सकता हूँ!!!. मेरा समर्थन तो अन्ना को नहीं है क्यूंकि में खुद corrupt hoon.. क्या आपका है?

| NEXT



Tags:     

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (25 votes, average: 4.04 out of 5)
Loading ... Loading ...

150 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Symona के द्वारा
July 11, 2016

Really trhrtwostuy blog. Please keep updating with great posts like this one. I have booked marked your site and am about to email it to a few friends of mine that I know would enjoy reading..

manushrivastav के द्वारा
May 7, 2012

बहुत badhiya व्यंग है. मेरा भी यही सवाल है, क्या हम करप्ट नहीं हैं? अगर हैं तो हम दूसरों को करप्शन नहीं करने से कैसे रोक सकते हैं !

    Rudra के द्वारा
    May 8, 2012

    dhanywaad ki aapko vyang accha laga.. aapney sahi kaha agar hum khud curropt hain tho dusron ko kaisey rok saktey hain?

yogi sarswat के द्वारा
May 7, 2012

रूद्र जी नमस्कार ! आप पहले बता देते ! असल में हुआ ये की मैंने भी आज ही भ्रष्टाचार पर व्यंग्य डाला है ! चलो कोई बात नहीं ! अब आते हैं आपके लेख पर ! आपने अन्ना आन्दोलन का एक सटीक चित्रण और आप बीती बयां की है ! बल्कि हकीकत बयां की है ! मैंने खुद इस तरह से होते हुए देखा है ! लेकिन मित्रवर जब इतने लोग इकठ्ठा होते हैं तो जरूरी नहीं की सब लोग पाक साफ़ हों ! कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो सच में चाहते हैं की जन्लोक्पल बिल आये और कुछ भीड़ बढाने वाले , टी वि पर अपना चेहरा दिखने को आतुर ! ये भी ठीक है की ज्यादातर लोग सिर्फ ऐसे ही आते हैं किन्तु फिर भी लोकतंत्र में भीड़ ही तो चाहिए ? भीड़ आदमियों की होनी चाहिए और क्या ! लोकतंत्र -भीडतंत्र ही तो है ! बहुत सटीक और यथार्थ लेखन !

    Kailey के द्वारा
    July 12, 2016

    30 avril 2010 moi, mon héros c’est Clark Kent, car où qu’il aille il n&oqbur;ouslie jamais de prendre son pyjama, la classe quoi.


topic of the week



latest from jagran