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चार दिन HIV संक्रमण के (भाग 1)

Posted On: 6 Feb, 2012 Others,लोकल टिकेट में

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( यह मेरे द्वारा लिखी गयी पहली कहानी है. कुछ गलती हो तो सूचित करें)
बात कुछ दिनों पहले की है. नए साल की शुरुवात में मुझे रक्त-दान का मौका मिला. आज तक मैने रक्त दान क्या थोडा सा रक्त भी नहीं दिया था. थोडा बहुत डरा हुआ था. मेरा बल्ड टेस्ट किया गया. उसके पहले एक फॉर्म भरा जिसमे बहोत सारे सवाल थे, मनन में भी थे . तभी एक पोस्टर देखा जिसपे लिखा था रक्त-दान महादान – आप रक्त दान कर एक जिंदगी बचा सकते हैं. मन को आनंद मिला. सारा डर चला गया. लगा चलो नए साल की शुरुवात ही एक नेक कार्य से हो.
रक्त दान के दो दिन बाद बल्ड बैंक से फ़ोन आया. किसी महिला ने कहा की मेरे रक्त के बारे में उनको कुछ संदेह है इसलिए मुझे दोबारा आ के बल्ड सेम्पल देना होगा. मैने अपने मित्र को बताया. उसने बोला की होगा कुछ हिमोग्लोबिन का प्रॉब्लम जा के दे दे. मैं दोबारा आया और सेम्पल दिया. उन्होने मुझे शाम तक आने को कहा . शाम को अपने कार्यालय से निकला. निकलते समय मुझे वो लड़की मिली जिसों में 4 साल से सिर्फ निहारता आ रहा था .लगा की चलो यात्रा बन गयी. मैने फिर उसके मांग की तरफ देखा, धड़कते दिल से. दिल ने फिर ख़ुशी की आह ली की सिंदूर अभी तक नहीं था. एक तरफ़ा तरंग यानि one sided love भी अजीब सा होता है. वो तो मुझे जानती तक नहीं होगी न मैने कभी कोशिश की. लेकिन तब भी एक अच्छा सा एहसास मन में था. किसी तरह में मोटर साइकिल को दौड़ाते हुए बल्ड बैंक पहुंचा . शाम के लगभग 7 बज गए थे. एक महिला बोली की आप थोडा मेरे इंतेजार करें और नाम पूछ के गयी. थोड़ी देर मैं दो लोग आये और मुजे एक रूम में ले गए. एक महिला ने अपने आपको NGO से जुडी हुई बताया और पुछा की मैं क्या करता हूँ? मेरी शादी हुई है की नहीं? मैं कहाँ रहता हूँ? वगैरह वगैरह. उन्होने मेरा फिर से संपले लिया और थोड़ी देर, रिपोर्ट आ जाने तक इन्तेजार करने को कहा. मेरा युवा मनन वहां भी युवतीओं को निहारने लगा.
कुछ देर में दोनों लोग रिपोर्ट ले के आये. वहां लोगों ने कहा “घबराने की कोई जरूरत नहीं. ऐसे केस हर दिन हमारे पास ५-६ आते हैं. बल्ड बैंक में, हमे हर तरह के जांच करने पड़ते हैं. आप HIV positive हैं. क्या आप बता सकते हैं की यह कैसे हुआ होगा?” इतना सुनते ही मेरे पैरों के नीची की जमीं खिसक गयी. मैने kabhi सपने में भी नहीं सोचा था. कभी कुछ ऐसा-वैसा नहीं किया. हमेशा dispoasable seringe इस्तेमाल किया जब भी सुई लेना हुआ. नशे की कोई आदत नहीं है. HIV संक्रमणएक ऐसा संक्रमण है की जयादातर लोग इसको आपके चरित्र से जोड़ देते हैं. NGO की महिला जो की एक पढ़ी लिखी और समझदार थी उसने भी यही गलती की. कहा की, कहीं मैने असुरछित शारीरिक सम्बन्ध तो नहीं बनाये. मैने उसे कहा “नहीं, मैं जानेव पहनता हूँ और इसके नियमो का पालन करता हूँ.” उसका कोई प्रतिक्रिया नहीं आया. शायद वो समझ नहीं पायी. ” ठीक है, आपको घबराने की आवशयकता नहीं है. आजकल काफी दवाईयां उपलब्ध हैं जो की HIV संक्रमण को एड्स में जल्दी परिवर्तित नहीं होने देता . आप बस 8 घंटे की नींद लें और दावा खाएं. दावा आपको सरकारी हॉस्पिटल से मुफ्त में मिल जाएगी. मुझे सरकारी हॉस्पिटल का नाम बता दिया गया.बोला गया की जितनी जल्दी हो सके आप हॉस्पिटल चलें जाये. HIV से सम्बंधित २ घंटे का अर्जित करने के बाद में बल्ड बैंक से निकला. मुझसे चला नहीं गया.
रात के 9 बज गए होंगे. में सड़क के किनारे बैठा था.मन नकारात्मक विचारों से भरा था. कभी लगता की नौकरी छोड़ देनी चाहिए तो कभी लगता की दुसरे शहर चले जाना चाहिए बिना किसी को बताये. रात को १२ बजे में घर पंहुचा. घर में मैं अकेला रहता हूँ. कोई पर्विवर के लोग यहाँ नहीं हैं. डॉक्टर ने कहा था 8 घंटे नीदं लेने की लेकिन यहाँ नींद गायब थी. जब आप नकारात्मक भाव से भरे हो तो पूरी दुनिया भी उस नकारात्मकता को बढ़ाने में लग जाती है. किसी तरह टी.वि खोला तो उसपे भी आनंद फिल्म आ रही थी. जो फिल्म मुझे कभी अच्छी नहीं लगी , आज मैं उस फिल्म मैं जीवन के रहस्य और उसके गहरे को देख पाया.शायद यह फिल्म मुझे प्रेरणा दे गयी.
दुसरे दिन ऑफिस गया. वहां भी किसी काम मैं मनन नहीं लग रहा था. हॉस्पिटल जाने के लिए मेनेजर से छुट्टी लेनी थी. लेकिन कहूँ तो क्या? यह तो बोले नहीं सकता था की मैं HIV से संक्रमित हूँ और मुहे अपने इलाज़ के लिए एक दिन की छुट्टी चाहिए.डर लगता था ki पता नहीं लोग किस नजर से देखें. किसी तरह शनिवार तक का इंतज़ार किया. मन में डर सा बैठा हुआ था. शनिवार को शहर के सरकारी हॉस्पिटल में गया. कुछ टेस्ट के बाद मुझे दावा दी गयी.कहा गया की ९ घंटे की नींद लें अवाम स्वस्थ भोजन करें. मनन में डर ऐसा बैठा की सिगरेट तक उसी दिन से छूट गया.अकेले कितना घुट घुट के जीता. किसी को बताना था…

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

seemakanwal के द्वारा
October 25, 2012

भावुक कथा ,पार्ट २ के इंतजार में .

    Rudra के द्वारा
    October 26, 2012

    धन्यवाद सीमा जी. जल्दी ही पार्ट २ प्रकाशित कर के आपको सूचित करूँगा :)

dineshaastik के द्वारा
April 5, 2012

गमगीन  बना देने वाला वृतांत….. http://dineshaastik.jagranjunction.com/author/dineshaastik/

chandanrai के द्वारा
March 12, 2012

रूद्र जी नमस्कार , बहुत ही संजीदगी से कहा गया सुंदर व्रतान्त आपका मित्र Read my poem at http://chandanrai.jagranjunction.com

minujha के द्वारा
February 6, 2012

आपने अच्छा चित्रण किया है  पीङा का,बढिया

    rudra के द्वारा
    February 7, 2012

    धन्यवाद मीनू जी. ऐसे ही हौसला आफजाई करेती रहे.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 6, 2012

रूद्र जी , दर्द को समझा है. सुन्दर लेख.

    rudra के द्वारा
    February 7, 2012

    कुशवाहा सर धन्यवाद. जल्दी ही कहानी की अंतिम कड़ी प्रकाशित करूँगा. उम्मीद है आपको पसंद आयेगी.


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